
बांग्लादेश की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। तारिक रहमान ने देश के नए प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ले ली है। राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने ढाका स्थित जातीय संसद भवन के साउथ प्लाजा में शाम करीब 4:15 बजे उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।
इससे पहले दिन में BNP संसदीय दल की बैठक में उन्हें सर्वसम्मति से नेता चुना गया था।
मजबूत संख्याबल के साथ सरकार
शपथ ग्रहण समारोह में BNP गठबंधन के 212 सांसद, जमात समर्थित गठबंधन के 76 सांसद और सात निर्दलीय सांसद शामिल रहे।
प्रधानमंत्री के साथ 25 कैबिनेट मंत्री और 24 राज्य मंत्रियों ने भी शपथ ली, जिससे नई सरकार का पूरा ढांचा औपचारिक रूप से स्थापित हो गया।
क्या लौट रहा है ‘लोकतंत्र’?
इस शपथ ग्रहण को कई राजनीतिक विश्लेषक बांग्लादेश में “लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पुनर्स्थापना” के रूप में देख रहे हैं। लंबे राजनीतिक संघर्ष और विवादों के बाद हुए चुनावों ने सत्ता परिवर्तन का रास्ता खोला है। हालांकि, विपक्ष और अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षक इस बदलाव को लेकर सतर्क भी हैं।
नई सरकार के सामने चुनौतियां
तारिक रहमान के नेतृत्व वाली सरकार के सामने तीन बड़ी चुनौतियां हैं कमजोर अर्थव्यवस्था को स्थिर करना। कानून व्यवस्था को मजबूत करना। वैश्विक मंच पर संतुलित विदेश नीति बनाना। South Asia में Bangladesh की रणनीतिक स्थिति को देखते हुए पड़ोसी देशों और वैश्विक शक्तियों की नजर अब ढाका पर टिकी है।

नई सरकार को भारत, चीन, अमेरिका और Gulf देशों के साथ रिश्तों को संतुलित करना होगा। Economic diplomacy और trade partnerships आने वाले महीनों में अहम भूमिका निभाएंगे।
कुर्सी बदल गई है, लेकिन चुनौतियां वही हैं। जनता ने mandate दे दिया, अब management की बारी है। ढाका की सियासत में उम्मीदें ऊंची हैं और धैर्य शायद थोड़ा कम।
आगे का रास्ता
सरकार के शुरुआती 100 दिन तय करेंगे कि यह बदलाव स्थिरता लाता है या नई बहसों की शुरुआत करता है। बांग्लादेश की राजनीति एक नए अध्याय में प्रवेश कर चुकी है और South Asia ध्यान से देख रहा है।
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